Monday, August 13, 2007

मौका भी है.. माहौल भी .. कमी है तो बस गीत संगीत की..

The post is dedicated to all the बेवडा s

वो शाम-ए-महफिल ही क्या जहाँ जाम ना हो और वो जाम ही क्या जब कोई अंजाम ना हो।

बगैर गीत के शराब नहीं चढती जैसे बगैर आपके ये शाम नहीं कटती।



"कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नहीं..
रात के साथ गयी बात मुझे होश नहीं.."


"मुझे दुनिया वालों शराबी ना समझो..
मैं पीता नहीं हूँ पिलायी गयी है.."


"फिर हाथ में शराब है सच बोलता हूँ मैं..
यह चीज़ लाजवाब है सच बोलता हूँ मैं..
गिनकर पियूं मैं जाम तो होता नहीं नशा
मेरा अलग हिसाब है सच बोलता हूँ मैं.."

"शेख जी थोड़ी सी पीकर आयी..
मेह क्या शेह फिर हमें बतलायी..
जाने दीजिए अक्ल की बातें जनाब
दिल की सुनिये और पीते जायी"

"कभी मैखाने तक जाते हैं हम और कम भी पीते हैं..
घटा ज़ुल्फ़ों की जाये तो बेमौसम भी पीते हैं.."


"-घमे जिन्दगी कुछ तो दे मशवरा..
मैं कहॉ जाऊं होता नहीं फैसला..
एक तरफ उसका घर एक तरफ मेह्कादा.."


"ये इंतज़ार गलत है की शाम हो जाये..
जो हो सके तो अभी दौरे-जाम हो जाये..
मुझ जैसे रिंद को भी तुने
हश्र में या रख बुला लिया है तो कुछ इंतज़ाम हो जाये..

हुई महंगी बहुत ही शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो
पियो लेकिन रखो हिसाब की थोड़ी थोड़ी पिया करो..
घाम का हो दौर या हो ख़ुशी समां बंधती है शराब..
एक मशवरा है जनाब के थोड़ी थोड़ी पिया करो..
दिल के ज़ख्म को सीना क्या पीने के लिए जीना क्या..
फूट डाले जिगर को शराब के थोड़ी थोड़ी पिया करो.."


"सबको मालूम है की मैं शराबी नहीं..
फिर भी कोई पिलाये तो मैं क्या करूं"


"शराब चीज़ ही ऐसी है.. ना छोड़ी जाये..
ये मेरे यार के जैसी है ना छोड़ी जाये.."


"मैखाने से शराब से सकी से जान से..
अपनी तो जिन्दगी शुरू होती है शाम से.."


"ना समझो की हम पी गए पीते पीते..
की थोडा सा हम जीं गए पीते पीते..
हमें सीढ़ी राहों ने रोका बहुत था..
कदम लाद्खादा ही गए पीते पीते..
नहीं देखे सकी ने हम से शराबी..
मैखाने में भी गए पीते पीते..
किसी ने जो पूछा की क्यों पी रहे हो..
तो हान्स के कहा पी गए पीते पीते.."

"दैरो हरम में बसने वालों..
मैखानों में फूट ना डालो.."


1 comment:

Anonymous said...

и всё эе: благодарю. а82ч

Add to Technorati Favorites Digg! StumbleUpon Toolbar

Label Cloud